More than 4 lakh pilgrims will perform Kalpvas; 'Prayagwal Nagar' has been established for the first time.4 लाख से अधिक कल्पवासी करेंगे कल्पवास, पहली बार बसाया

4 लाख से अधिक कल्पवासी करेंगे कल्पवास, पहली बार बसाया गया ‘प्रयागवाल नगर’

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More than 4 lakh pilgrims will perform Kalpvas; 'Prayagwal Nagar' has been established for the first

आस्था, धर्म और संस्कृति के सबसे बड़े वार्षिक आयोजनों में से एक माघ मेला का शुभारंभ पौष पूर्णिमा के स्नान पर्व (3 जनवरी) से हो रहा है। संगम तट पर लगने वाले इस दिव्य आयोजन के साथ ही माघ मेला क्षेत्र में तप, साधना और संयम की त्रिवेणी प्रवाहित होने लगेगी। पौष पूर्णिमा से प्रारंभ होने वाला माघ मेला 15 फरवरी (महाशिवरात्रि) तक चलेगा।

कल्पवास की शुरुआत, साधना में डूबेगा संगम क्षेत्र

पौष पूर्णिमा के साथ ही कल्पवास की परंपरा भी शुरू हो जाएगी। यह वह अवधि होती है, जब श्रद्धालु एक महीने तक गंगा–यमुना के तट पर रहकर कठोर तप, संयम और साधना करते हैं। इस वर्ष कल्पवासियों की संख्या में अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की जा रही है। मेला प्रशासन के अनुमान के अनुसार, इस बार 4 लाख से अधिक कल्पवासी संगम तट पर कल्पवास करेंगे।

माघ मेला क्षेत्र में एक ओर दंडी संन्यासी, रामानंदी आचार्य, खालसा पंथ के संत, तो दूसरी ओर चतुष्पीठ के शंकराचार्यों की उपस्थिति से अध्यात्म का विराट स्वरूप देखने को मिलेगा। श्रद्धालुओं के जप, तप और साधना से गंगा तट आलोकित रहेगा।

पहली बार कल्पवासियों के लिए बना ‘प्रयागवाल नगर’

कल्पवासियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए इस वर्ष पहली बार माघ मेला क्षेत्र में अलग से एक नगर बसाया गया है, जिसे ‘प्रयागवाल नगर’ नाम दिया गया है।
एडीएम माघ मेला दयानंद प्रसाद के अनुसार, महाकुंभ 2025 की स्मृति और 12 वर्षों बाद कल्पवास के संकल्प की परंपरा के कारण इस बार बड़ी संख्या में श्रद्धालु कल्पवास के लिए पहुंचे हैं।

कल्पवासियों के लिए 950 बीघा क्षेत्र में प्रयागवाल नगर बसाया गया है, जो नागवासुकी मंदिर के सामने गंगा नदी के पार स्थित है। यह निर्णय तीर्थ पुरोहितों और मेला प्रशासन के साथ विचार-विमर्श के बाद लिया गया। इसके अलावा, विभिन्न सेक्टरों में भी श्रद्धालुओं की सुविधा के अनुसार तंबू लगाए गए हैं, खासकर बुजुर्ग कल्पवासियों को ध्यान में रखते हुए उन्हें गंगा तट के नजदीक स्थान दिया गया है, ताकि उन्हें स्नान के लिए अधिक दूरी तय न करनी पड़े।

स्वच्छता और शीत लहर से बचाव पर विशेष जोर

योगी सरकार माघ मेला क्षेत्र को दिव्य, भव्य और स्वच्छ स्वरूप देने के लिए विशेष प्रयास कर रही है। मेला प्रशासन ने कल्पवासियों के शिविरों में स्वच्छता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है।
श्रद्धालुओं से अपील की गई है कि वे सिंगल यूज प्लास्टिक का प्रयोग न करें।

शीत लहर को देखते हुए बुजुर्ग कल्पवासियों के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं। शिविरों के बाहर अलाव जलाने की व्यवस्था की गई है ताकि ठंड से बचाव हो सके।

माघ मेला 2026 के प्रमुख स्नान पर्व

  • पौष पूर्णिमा – 3 जनवरी

  • मकर संक्रांति – 14 जनवरी

  • मौनी अमावस्या – 18 जनवरी

  • बसंत पंचमी – 23 जनवरी

  • माघी पूर्णिमा – 1 फरवरी

  • महाशिवरात्रि – 15 फरवरी